राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर भटगांव में भव्य पथ संचलन
हर गली में गूंजे जयघोष,सैकड़ो स्वयंसेवक एक साथ बढ़े कदमताल करते हुए

भटगांव – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को भटगांव में ऐतिहासिक पथ संचलन का आयोजन किया गया नगर की गलियां भगवा रंग में सराबोर दिखी हर मोड़ हर गली पर भारत माता की जय और वंदेमातरम के नारे गूंजते रहे।यह संचलन केवल एक शोभायात्रा नहीं बल्कि अनुसाशन सेवा और राष्ट्रभावना का जीवंत प्रदर्शन बन गया।
नगर के कदम चौक से निकला संचलन 14 प्रमुख चौकों से गुजरा जत्था रविवार दोपहर ठीक तीन बजे कदम चौक स्तिथ प्राथमिक शाला स स्कूल के प्रांगण से संचलन का सुभारंभ हुआ सैकड़ो स्वसेवक पूर्ण गणवेष में दंड हाथ मे लिए अनुशासन बद्ध पंक्तियों में निकले संचलन का मार्ग नगर के प्रमुख स्थलों से होकर गुजरा संचलन का समापन सेजेस स्कूल भटगांव के प्रांगण में हुआ जहां बौद्धिक सत्र आयोजित किया गया ।हर चौक चौराहा में पर पुष्पवर्षा जय घोष से गुंजा वातावरण जैसे जैसे स्वयंसेवक आगे बढ़ते गए नागरिकों ने घर की छतों से पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया.

यह संचलन राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा-डॉ .ओमप्रकाश शर्मा श्री प्रेम भुवन प्रताप सिंह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भटगांव में हुए बौद्धिक सत्र में छतीसगढ़ प्रांत के सह बौद्धिक प्रमुख डॉक्टर ओमप्रकाश शर्मा ने कहा-संघ का शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं बल्कि आत्ममंथन और संकल्प का समय है।संघ की 100 वर्ष की यात्रा सेवा संस्कार और संकल्प का समय है।संघ की सौ वर्ष की यात्रा सेवा संस्कार और संगठन की मिसाल है।यह संचलन राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा है।उन्होंने पंच परिवर्तन की अवधारणा पर बोलते हुए समाज संस्कृति शिक्षा पर्यावरण आर्थिक जीवन मे सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश दिया।

वहीं डॉक्टर शर्मा ने कहा कि समाजिक समरसता पर संघ के द्वितीय सर संघ चालक पूजनीय श्री गुरुजी(माधव सदाशिव राव गोलवलकर जी) सन 1969 में उडुपी में एक धर्म संसद का आयोजन रखा उस आयोजन में सभी पूज्य शंकराचार्य जी सभी मठों के प्रमुख और देश के अलग अलग भाग से आये साधु संत एक मंच पर उपस्थित रहे आधुनिक भारत के इतिहास में यह एकमात्र सबसे बड़ा समरसता का आयोजन रहा।सभी ने एक मंच से समरसता मंत्र उच्चारित किया। हिन्दव:सोदरा:सर्वे,न हिंदू:पतितो भवेत, मम दीक्षा हिंदू रक्षा, मम मंत्र:समानता ।। अर्थात-सभी हिन्दू सहोदर (एक ही माँ के उदर से जन्मे)हैं।कोई हिंदू नीच या पतित नहीं हो सकता हिंदुओं की रक्षा मेरी दीक्षा है।समानता यही मेरा मंत्र है।श्री गुरुजी को विस्वास था कि देश के प्रमुख धर्माचार्य यदि समाज से आह्वान करेंगे कि अस्पृश्यता के लिए हिन्दू धर्म मे कोई स्थान नहीं है।इसलिए हमें सबके साथ समानता का व्यवहार रखना चाहिए तब जनसामान्य इस बात को सहजता के साथ स्वीकार कर लेगा और सामाजिक समरसता कि दिशा में बड़ा कार्य सिद्ध हो जाएगा।

वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी से बढ़ा आयोजन का गौरव – इस अवसर सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के जिला कार्यवाह हेमचन्द्र साहू,एवं बोधीराम साहू (से.नि.शिक्षक) वरिष्ठ प्रज्ञा पुत्र मुख्य वक्ता के रूप में डॉक्टर ओमप्रकाश शर्मा जी (प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख ) मंचित रहे| वहीं उपस्थित नागरिकों ने बोला अनुशासन और एकता की मिशाल है संघ कार्यक्रम के पश्चात नागरिकों ने कहा कि संघ का यह संचलन अनुशासन एकता और संघठन की अद्भुत झलक था। वहीं मातृ शक्तियों ने कहा आज हमारे बच्चों ने देखा कि संगठन का अर्थ क्या होता है संघ के स्वयंसेवक समाज के हर वर्ग के लिए प्रेरणा हैं।

संघ की सौ वर्षीय यात्रा -सेवा संस्कार और समर्पण की परंपरा 1925 में डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा नागपुर में स्थापित राष्ट्रिय स्वयंसेवक संघ ने अपने सौ वर्षों में सेवा शिक्षा और समाज जागरण की मिशाल कायम की है। भटगांव में निकला यह पथ संचलन उसी सौ वर्षीय परम्परा का प्रतिक बन गया।प्रत्येक स्वयसेवक के कदम में था अनुशासन हर मुख से गूंज रहा था राष्ट्र भक्ति का स्वर संघ के कदमो की ताल पर झूम उठा भटगांव नगर ने देखा एकता अनुशासन और समर्पण की मिशाल
